| पुस्तक का नाम | टेलीग्नोसिस – “प्राचीन भारतीय ज्योतिष विज्ञान” |
| लेखक | हिमांशुराय रावल “हकीर” |
| अनुवादक | पं. अजय शर्मा और पं. पंकज मिश्र |
| ISBN | 978-93-47166-78-5 |
| प्रकाशक | Koryfi Group of Media and Publications |
| पेपरबैक मूल्य | ₹ 650/- |
| ई-पुस्तक मूल्य | ₹ 450/- |
| प्रारूप | पेपरबैक एवं ई-पुस्तक |
| पुस्तक का आकार | 5.5″ × 8″ |
| पृष्ठ संख्या | 220 |
| आयु वर्ग | 10 वर्ष एवं उससे अधिक |
| कागज़ का प्रकार | सफेद कागज़ |
| आंतरिक मुद्रण | काला और सफ़ेद |
| आवरण | मैट फ़िनिश |
| विषय श्रेणी | प्राचीन भारतीय ज्ञान, भारतीय विज्ञान, ज्योतिष विज्ञान |
| भाषा | हिंदी |
| प्रकाशन | अगस्त २०२६ |
| संस्करण | प्रथम संस्करण (२०२६) |
टेलीग्नोिसस – प्राचीन भारतीय ज्योतिष विज्ञान – हिंदी संस्करण (पेपरबैक)
Original price was: ₹650.00.₹500.00Current price is: ₹500.00.
वैदिक दर्शन में सत्य को समझने के छह मुख्य साधनों में से एक के रूप में ज्योतिष को शामिल किया गया है। बहुत कम लोग ज्योतिष (भारतीय ज्योतिष) और ‘एस्ट्रोलॉजी’ (पश्चिमी ज्योतिष) के बीच का अंतर जानते हैं। वे यह नहीं समझ पाते कि विद्वान व्यक्तियों की कुंडली के भविष्य बताने वाले हिस्से को तो नकार देते हैं, लेकिन आयुर्वेद, बृहत्संहिता, प्रश्न मार्ग आदि जैसे उत्तर-वैदिक साहित्य में मौजूद इन्हीं तरीकों को स्वीकार करते हैं।
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Book Description
About Book
क्या बिना व्यक्ति की उपस्थिति के उसकी समस्या का कारण जाना जा सकता है?
क्या दूर बैठे किसी रोग, अपराध, पारिवारिक विवाद या अन्य जटिल परिस्थिति का भारतीय ज्ञान परम्परा के आधार पर विश्लेषण संभव है?
‘टेलीग्नोसिस’ इन्हीं प्रश्नों का एक नवीन, तार्किक एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा पर आधारित उत्तर प्रस्तुत करने का प्रयास है। यह पुस्तक भारतीय भविष्यवाणी विज्ञान की उन प्राचीन एवं प्रमाणित विधाओं को सरल, व्यवस्थित एवं शिक्षणपरक शैली में प्रस्तुत करती है, जिनका उल्लेख ज्योतिष, आयुर्वेद, प्रश्नशास्त्र, स्वरशास्त्र, आरूढ़, भारतीय अंकशास्त्र, शकुन-विज्ञान तथा अन्य भारतीय ग्रंथों में मिलता है।
इस पुस्तक का आधार केवल सैद्धांतिक अध्ययन नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव एवं शोध भी है। गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) द्वारा वर्ष 2023 में इस विषय पर विश्व के शैक्षणिक जगत का प्रथम ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किया गया, जिसके उपरांत इस पुस्तक का लेखन किया गया। साथ ही, अमेरिका स्थित दो प्रतिष्ठित चिकित्सकों के साथ किए गए सफल प्रयोगों के निष्कर्ष भी इस पुस्तक में प्रमाणस्वरूप सम्मिलित किए गए हैं।
पुस्तक में चिकित्सा, अपराध अन्वेषण, पारिवारिक एवं सामाजिक समस्याएँ, वास्तु, कृषि, व्यापार तथा जीवन की अनेक जटिल परिस्थितियों के विश्लेषण हेतु भारतीय ज्ञान परम्परा में वर्णित सिद्धांतों का सरल एवं व्यावहारिक विवेचन किया गया है। यह पाठकों को केवल भविष्यवाणी की विधियाँ ही नहीं सिखाती, बल्कि उनके पीछे निहित वैज्ञानिक एवं दार्शनिक दृष्टिकोण को भी समझाती है।
इस ग्रंथ को भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन हेतु गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) के धरोहर विभाग द्वारा अनुशंसित किया गया है तथा इसके गुजराती संस्करण के प्रकाशन का निर्णय अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा लिया गया है। इसकी जानकारी विश्वभर के लगभग 500 शैक्षणिक संस्थानों तक भी प्रसारित की जा चुकी है।
इस पुस्तक को जगत्गुरु शंकराचार्य (द्वारकापुरी) अनंतश्री सदानंद सरस्वती, माननीय मुख्यमंत्री, गुजरात श्री भूपेन्द्र भाई पटेल, डॉ. विक्रम सिंह (कुलपति, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी), गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी तथा ज्योतिर्विद श्री जयप्रकाश माढक के शुभेच्छा संदेश प्राप्त हुए हैं, जो इसकी विषयवस्तु की महत्ता एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।
प्रकाशक:
Koryfi Group of Media and Publications
यदि आप भारतीय ज्ञान परम्परा, ज्योतिष, आयुर्वेद तथा भारतीय भविष्यवाणी विज्ञान की वास्तविक गहराई को समझना चाहते हैं, तो ‘टेलीग्नोसिस’ आपके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक नई दृष्टि, नया चिंतन और भारतीय ज्ञान-विज्ञान के अनछुए आयामों की ओर ले जाने वाली मार्गदर्शिका सिद्ध होगी।
Description
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क्या बिना व्यक्ति की उपस्थिति के उसकी समस्या का कारण जाना जा सकता है?
क्या दूर बैठे किसी रोग, अपराध, पारिवारिक विवाद या अन्य जटिल परिस्थिति का भारतीय ज्ञान परम्परा के आधार पर विश्लेषण संभव है?
‘टेलीग्नोसिस’ इन्हीं प्रश्नों का एक नवीन, तार्किक एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा पर आधारित उत्तर प्रस्तुत करने का प्रयास है। यह पुस्तक भारतीय भविष्यवाणी विज्ञान की उन प्राचीन एवं प्रमाणित विधाओं को सरल, व्यवस्थित एवं शिक्षणपरक शैली में प्रस्तुत करती है, जिनका उल्लेख ज्योतिष, आयुर्वेद, प्रश्नशास्त्र, स्वरशास्त्र, आरूढ़, भारतीय अंकशास्त्र, शकुन-विज्ञान तथा अन्य भारतीय ग्रंथों में मिलता है।
इस पुस्तक का आधार केवल सैद्धांतिक अध्ययन नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव एवं शोध भी है। गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) द्वारा वर्ष 2023 में इस विषय पर विश्व के शैक्षणिक जगत का प्रथम ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किया गया, जिसके उपरांत इस पुस्तक का लेखन किया गया। साथ ही, अमेरिका स्थित दो प्रतिष्ठित चिकित्सकों के साथ किए गए सफल प्रयोगों के निष्कर्ष भी इस पुस्तक में प्रमाणस्वरूप सम्मिलित किए गए हैं।
पुस्तक में चिकित्सा, अपराध अन्वेषण, पारिवारिक एवं सामाजिक समस्याएँ, वास्तु, कृषि, व्यापार तथा जीवन की अनेक जटिल परिस्थितियों के विश्लेषण हेतु भारतीय ज्ञान परम्परा में वर्णित सिद्धांतों का सरल एवं व्यावहारिक विवेचन किया गया है। यह पाठकों को केवल भविष्यवाणी की विधियाँ ही नहीं सिखाती, बल्कि उनके पीछे निहित वैज्ञानिक एवं दार्शनिक दृष्टिकोण को भी समझाती है।
इस ग्रंथ को भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन हेतु गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) के धरोहर विभाग द्वारा अनुशंसित किया गया है तथा इसके गुजराती संस्करण के प्रकाशन का निर्णय अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा लिया गया है। इसकी जानकारी विश्वभर के लगभग 500 शैक्षणिक संस्थानों तक भी प्रसारित की जा चुकी है।
इस पुस्तक को जगत्गुरु शंकराचार्य (द्वारकापुरी) अनंतश्री सदानंद सरस्वती, माननीय मुख्यमंत्री, गुजरात श्री भूपेन्द्र भाई पटेल, डॉ. विक्रम सिंह (कुलपति, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी), गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी तथा ज्योतिर्विद श्री जयप्रकाश माढक के शुभेच्छा संदेश प्राप्त हुए हैं, जो इसकी विषयवस्तु की महत्ता एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।
प्रकाशक:
Koryfi Group of Media and Publications
यदि आप भारतीय ज्ञान परम्परा, ज्योतिष, आयुर्वेद तथा भारतीय भविष्यवाणी विज्ञान की वास्तविक गहराई को समझना चाहते हैं, तो ‘टेलीग्नोसिस’ आपके लिए केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक नई दृष्टि, नया चिंतन और भारतीय ज्ञान-विज्ञान के अनछुए आयामों की ओर ले जाने वाली मार्गदर्शिका सिद्ध होगी।
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